Sport
  • 13-Jul-2020
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भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में कप्तानी करना किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। सुनील गावस्कर से लेकर कपिल देव, मोहम्मद अजहरुद्दीन से लेकर सौरव गांगुली और एमएस धौनी से लेकर विराट कोहली तक ने टेस्ट क्रिकेट में काफी नाम बतौर कप्तान कमाया है, क्योंकि भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी करना अपने आप में एक प्रतिष्ठा है, क्योंकि ये नाम आपके साथ जुड़ जाता है। अजिंक्य रहाणे के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

अजिंक्य रहाणे ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया जैसे देश के खिलाफ भारतीय टीम की कप्तानी की थी। इतना ही नहीं, उस टेस्ट मैच को जीतकर भारत ने सीरीज भी जीती था। रहाणे ने सीरीज के आखिरी यानी चौथे टेस्ट मैच में धर्मशाला के मैदान पर टीम की कप्तानी की थी। ये मुकाबला आसान नहीं था, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज का पहला मुकाबला जीता था, जबकि भारत ने दूसरा मैच जीता था, लेकिन तीसरा मैच ड्रॉ रहा था। ऐसे में ये मैच सीरीज डिसाइडर था।

इस अहम से ठीक पहले भारतीय टीम के लिए एक बुरी खबर आई कि कप्तान विराट कोहली आखिरी टेस्ट मैच में चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे, क्योंकि तीसरे टेस्ट मैच में फील्डिंग के दौरान विराट कोहली को चोट लगी थी। अपने क्रिकेट करियर से जुड़े इस ऐतिहासिक लम्हे को लेकर अंजिक्य रहाणे ने ईएसपीएन क्रिकइंफो से बात करते हुए कहा है कि यह उनके लिए एक विशेष अवसर था कि वह सबसे लंबे प्रारूप में भारतीय टीम की कप्तान हैं।

रहाणे ने कहा है, “भारतीय टीम की कप्तानी मेरे लिए काफी खास थी, खासकर उस टेस्ट मैच में जो 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मैच था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं टीम की कप्तानी करूंगा। मुझे बताया गया कि मैच की पूर्व संध्या पर आपको सूचित किया जाएगा कि आप अगले मैच में टीम की कप्तानी कर सकती हैं, क्योंकि उस समय विराट कोहली का फिटनेस टेस्ट होना था।”