Madhya Pradesh

  • 03-Jan-2021
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अगर आप मध्यप्रदेश में झरनों और संगमरमर की चट्टानों का आनंद लेना चाहते हैं, तो जबलपुर के पास स्थित भेड़ाघाट जाना अच्छा विकल्प है। भेड़ाघाट मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक शहर और नगर पंचायत है। जबलपुर शहर से लगभग 20 किमी दूर भेड़ाघाट नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। भेड़ाघाट को संगमरमरीय सौंदर्य और शानदार झरनों के लिए ही जाना जाता है, साथ ही धुआंधार जलप्रपात चमकती हुई मार्बल की 100 फीट ऊंची चट्टनों के लिए भी पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है।

Madhya Pradesh भेड़ाघाट पर्यटन- Bhedaghat Tourism

यह जगह तब और खूबसूरत लगती है जब इन संगमरमर की सफेद चट्टानों पर सूर्य की किरणें और पानी पर छाया पड़ती है। तब काले और गहरे रंग के ज्वालामुखीय समुद्रों के साथ इन सफेद चट्टानों को देखना सुखद अनुभव होता है, इतना ही नहीं चांदनी रात में यह और भी ज्यादा जादुई प्रभाव पैदा करती हैं। नर्मदा नदी इन संगमरमर की चट्टानों के माध्यम से धीरे-धीरे बहती है और थोड़ी दूर जाकर धुंआधार के रूप में प्रसिद्ध एक झरने में मिल जाती है। प्रकृति को पसंद करने वालों के लिए यहां बोट राइडिंग की सुविधा भी है।

चांदनी रात में संगमरमर के रॉक पहाड़ों के बीच होने वाली नाव की यात्रा पर्यटकों को आकर्षित करती है। अगर आप मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता और झरनों का आनंद लेना चाहते हैं तो छुट्टियों में भेड़ाघाट जरूर जाएं। यहां ऐसी कई दुकानें हैं जहां आपको संगमरमर के हस्तशिल्प और धार्मिक चिन्ह खरीदने को मिलेंगे। भेड़ाघाट में हर साल कार्तिक महीने में विशाल मेला आयोजित होता है। भारतीय मेलों की छटा और कला आपको इस मेले में देखने को मिलेगी। तो चलिए इस आर्टिकल में आज हम आपको सैर कराएंगे झरनों के स्थल भेड़ाघाट की।

भेड़ाघाट का इतिहास

भेड़ाघाट का इतिहास 180-250 करोड़ साल पुराना माना जाता है। भेड़ाघाट के नाम को लेकर कई कहानियां भी प्रचलित हैं। इतिहास की मानें तो प्राचीनकाल में भृगु ऋषी का आश्रम इसी जगह पर था और यह वह स्थल है जहां नर्मदा का पवित्र बावनगंगा के साथ संगम होता है। बुंदेली भाषा में भेड़ा का अर्थ भिड़ना या मिलने से होता है। क्योंकि ये दोनों नदियां यहां आकर मिलती हैं, इस मिलन के कारण ही इस जगह का नाम भेड़ाघाट रखा गया था।

भेड़ाघाट झरना से जुड़े रोचक तथ्य

बॉलीवुड फिल्म अशोका के लोकप्रय गीत “रात का नशा अभी” गीत नर्मदा नदी की संगमरमर की चट्टानों के बीच फिल्माया गया है।
2016 में हिंदी फिल्म मोहेंजो दारो के मगरमच्छ से लड़ने के दृश्य भेड़ाघाट में फिल्माए गए है।
वर्ष 1961 में राजकूपर और पद्मिनी द्वारा प्रदर्शित फिल्म जिस देश में गंगा बहती है का सबसे हिट गाना भी यहीं शूट किया गया था। इसके अलावा एक अन्य हिंदी फिल्म प्राण जाए पर वचन ना जाए की शूटिंग भी भेड़ाघाट में हुई थी।
भेड़ाघाट को जिले की नगर पंचायत के रूप में जाना जाता है।
इन जगह की संगमरमर की चट्टानों को उन हजार स्थानों में से एक माना गया है, जिन्हें अपने जीवन में एक बार जरूर देखना चाहिए।

भेड़ाघाट मार्बल रॉक्स वोटिंग एरिया

भेड़ाघाट में मार्बल रॉक्स देखने लायक हैं। इन संगमरमर की चट्टानों के बीच ही अशोका फिल्म के गाने की शूटिंग करीना कपूर ने पानी के बीचों-बीच की थी। संगमरमर की चट्टानें पर्यटकों के लिए खूबसूरत दर्शनीय स्थल है।

धुआंधार वाटर फॉल

नर्मदा नदी के दोनों किनारों की ऊंची चट्टानों से घिरा यह मशहूर मनमोहक स्थल है। यहां नर्मदा नदी मार्बल की चट्टानों के माध्यम से तेजी से अपना मार्ग प्रशस्त करती है और पहाड़ से 100 फुट नीचे की ओर झरने के रूप में गिरती है। पानी के इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण चारों तरफ धुंआ उठता दिखाई देता है और फुहार घनी होकर धुएं का रूप ले लेती हैं। इसी वजह से इस जगह को धुआंधार फॉल्स कहा जाता है। इस दौरान पानी का बहाव इतना तेज होता है कि दूर से भी गर्जन सुनाई देती है। यह घाट क्षेत्र से सिर्फ 1.5 किमी दूर है। धुआंधार जलप्रपात को आप केबल कार के जरिए भी देख सकते हैं।

चौसठ योगिनी मंदिर जबलपुर

धुंआधार से थोड़ी ही दूरी पर चौंसठ योगिनी मंदिर है। यह मंदिर हिंदू पौराणिक कथाओं में ब्रह्मांड की जननी मानी जाने वाली देवी दुर्गा को समर्पित है। यहां पर 10वीं शताब्दी के कलचुरी वंश की पत्थरों से तराशी गई मूर्तियां हैं। अब हालांकि ज्यादातर मूर्तियां टूट गई हैं। माना जाता है कि यह प्राचीन मंदिर के भूमिगत मार्ग से गोंड रानी दुर्गावती के महल से जाकर मिलता है। इस मंदिर की खासियत यहां बीच में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा है। बताया जाता है कि इस मंदिर में आज भी 64 योगिनियां पहरा देती हैं। इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान भक्तों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ती है। इतिहासकारों के अनुसार एक जमाने में चौंसठ योगिनी मंदिर का नाम गोलकी मठ था।

सी वर्ल्ड वाटर पार्क जबलपुर

सी वर्ल्ड वाटर पार्क दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए अच्छी जगह है। पूरा एक दिन बिताने के लिए यह आदर्श स्थान है। यहां बड़ों के अलावा बच्चों के लिए अलग से एक पूल है। यह जबलपुर का एक मात्र वॉटरपार्क है। यहां एडवेंचर वॉटर राइड और रोलर कोस्टर की सवारी आपके ट्रिप में जान डाल देगी। यह वॉटर पार्क सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुलता है। बड़ों के लिए यहां एंट्री फी 360 रूपए प्रति व्यक्ति है जबकि बच्चों के लिए 270 रूपए एंट्री फी रखी गई है। बता दें कि जबलपुर स्टेशन से वॉटर पार्क की दूरी 11.3 किमी है, जबकि जबलपुर एयरपोर्ट से यह 21.8 किमी दूर है।

बैलेंसिंग रॉक जबलपुर

यह जगह जबलपुर सिटी से मात्र 2 किमी की दूरी पर स्थित है। यह जगह शारदा देवी मंदिर के रास्ते में पड़ती है। यहां एक दीर्घगोलाकर शिला आश्चर्यजनक ढंग से एक विशाल चट्टान पर अपने गुरूत्व केंद्र पर टिका हुआ है। यह भूतात्तिव कारणों से अस्तित्व में आया, इसमें मानव का कोई योगदान नहीं है। इस शिला की खासियत यह है कि इसकी विशालता, भार, कठोरता और सटीक गुरूत्व केंद्र होने के कारण आज भी ये अपनी मूल अवस्था में बना हुआ है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह अच्छी जगह है। यहां आप 15-20 मिनट का समय बिता सकते हैं साथ ही फोटो भी क्लिक कर सकते हैं।

भेड़ाघाट में नर्मदा महोत्सव

प्रकृति की इस खूबसूरत रचना की प्रशंसा करने के लिए, हर साल भेड़ाघाट में नर्मदा महोत्सव के रूप में एक शुभ कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस भव्य कार्यक्रम में बॉलीवुड की प्रसिद्ध हस्तियों द्वारा नृत्य, नाटक और संगीत की शानदार प्रस्तुति शामिल है। कार्यक्रम शरद पूर्णिमा ’यानी अक्टूबर को आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर प्रसिद्ध गायकों और कलाकारों की मौजूदगी दर्शकों की भारी भीड़ खींचती है और लोग इस पूर्णिमा की रात दूधिया सफेद पानी में नौका विहार का आनंद लेते हैं।

भेड़ाघाट का मौसम

गर्मियों में भेड़ाघाट जाना थोड़ा सही समय है। यहां गर्मी बहुत ज्यादा नहीं रहती। तपमान अधिकतम 34 डिग्री सेल्सियस तक जाता है, लेकिन मई -जून का महीना यहां ज्यादा गर्म होता है। इसलिए आप चाहें तो मई से पहले की गर्मियों में आप यहां छुट्टियां बिताने आ सकते हैं।

मानसून में भेड़ाघाट – भेड़ाघाट जाने के लिए मानसून उपयुक्त समय नहीं है। यहां मानसून में भारी बरिश होती है और सबकुछ इस समय बंद हो जाता है। यहां तक की इस मौसम में जाकर आप बोट राइड का भी आनंद नहीं ले पाएंगे।

सर्दियों में भेड़ाघाट – मध्यप्रदेश में सर्दी बहुत नहीं पड़ती। इसलिए भेड़ाघाट को सर्दियों के ब्रेक के लिए उपयुक्त समय माना जाता है। इस दौरान यहां का मौसम सुहावना होता है। तापमान 10-20 डिग्री सेल्सियस ही होता है।

भेड़ाघाट जबलपुर में क्या-क्या कर सकते हैं

भेड़ाघाट में नर्मदा नदी पर पर्यटक नौका विहार और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।
जब आप मार्बल रॉक्स के बीच नाव की सवारी कर रहे होंगे, तब गाइड कॉमिक शैली में आपको प्यार की कहानी सुनाकर आपका अच्छा मनोरंजन करेगा।

यहां पर आप बंदर कूदनी पर भी जा सकते हैं। जब कोई एक नाव में संगमरमर की चट्टानों के बीच यात्रा करता है तो दोनों तरफ के पहाड़ इतने करीब आ जाते हैं कि बंदर उनके चारों ओर कूदने लगते हैं, इसलिए इस जगह को बंदर कूदनी कहा जाता है।

चट्टान का निर्माण जैसे हिरण मीरन कुंच, हाथी का पौन, हाथी पैर, एक गाय के सींघ और घोड़े के पैरों के निशान यहां देखने लायक हैं।

भेड़ाघाट में क्या खरीद सकते हैं

भेड़ाघाट संगमरमर की कलाकृतियों के लिए काफी मशहूर है। यहां सोपस्टोन नाम का बाजार प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटक एक बार इस बाजार में जरूर जाते हैं। इस बाजार में हस्तशिल्प जैसे लिंगम, एशट्रेज और देवी-देवताओं की मूर्तियां आप खरीद सकते हैं।

भेड़ाघाट भारत आकर्षक स्थल लेजर शो

भेड़ाघाट को विश्व के नक्शे में लाने की पहल के चलते यहां भेड़ाघाट के पंचवटी में लेजर शो शुरू किया गया है। इस लेजर शो के जरिए नर्मदा से दुनिया का परिचय कराया जाता है। इस शो में नर्मदा की गौरव गाथा अलग अंदाज में जानने को मिलती है। हजारों साल पुरानी परंपरा से लेकर आधुनिकता का दौर भी देखने को मिलता है। विश्व पटल पर संगमरमर की खूबसूरत वादियों की नई खूबियों से लोग परीचित होते हैं।

मंगलवार से शुक्रबार तक 7.30 से 8 बजे और 8:30 से 9 बजे तक दो ही शो आयोजित होता है। जबकि शनिवार और रविवार को तीन शो का आयोजन किया जाता है। 7:30 से 8 बजे, 8:15 से 8:45 और 9 बजे से 9:30 तक शो दिखाया जाता है। हर शो तीन भागों में विभाजित है। आधे घंटे के शो में हर भाग 10 मिनट का रखा गया है। पहले भाग में भेड़ाघाट की खूबसूरती का जिक्र होता है उसके बाद 10 मिनट तक देशभक्ति गीतों के जरिए फाउंटेन की रंगबिरंगी फुहारों के बीच दर्शकों को लुभाने का प्रयास किया जाता है।

बोट राइट (भेड़ाघाट नौका विहार) के लिए किस समय जा सकते हैं

भेड़ाघाट में बोट राइडिंग का समय सुबह 10 से शाम 5 बजे तक होता है। संगमरमर पर सूरज की किरणें देखनी हैं तो शाम 4 बजे के स्लॉट पर जाएं। बोट राइड के दौरान कैप जरूर पहनें। अंतिम रोपवे यहां 6 बजे बंद हो जाता है। यहां आप नाव की यात्रा एक घंटे में तक कर सकते हैं। हालांकि पहले यहां चांदनी रात में नाव की सवारी कराई जाती थी, लेकिन असामाजिक गतिविधियों के कारण अधिकारियों ने रात में नाव की सवारी पर रोक लगा दी है। एक नाव में तीन लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है, जिसके लिए 800 रूपए चार्ज लिया जाता है, आप थोड़ा मोलभाव करके इसे 600 रूपए करा सकते हैं। नाव में बैठने से पहले टिकट काउंटर से लाइफ जैकेट जरूर लें।

कैसे पहुंचे भेड़ाघाट

भेड़ाघाट जबलपुर के पास स्थित है, इसलिए आपको पहले जबलपुर जाना होगा। अगर आप फ्लाइट से भेड़ाघाट जाना चाहते हैं तो जबलपुर हवाई अड्डा भेड़ाघाट के नजदीक हैं जिसे डुमना एयरपोर्ट जबलपुर के नाम से जाना जाता है। हवाई अड्डे से भेड़ाघाट की दूरी मात्र 34.1 किमी है। इसके अलावा जबलपुर रेलवे स्टेशन भेड़ाघाट के करीब है, यहां से भेड़ाघाट 20 किमी दूर है। वहीं अगर आप बाय रोड बस या टैक्सी से जाते हैं तो रांझी बस स्टैंड भेड़ाघाट से पास पड़ेगा। यहां से भेड़ाघाट की दूरी 27.9 किमी है। यहां पहुंचने के बाद आप सार्वजनिक वाहन से भेड़ाघाट पहुंच सकते हैं।

भेड़ाघाट की टाइमिंग

भेड़ाघाट में आप सुबह 8 बजे से शाम के 6 बजे तक बोटिंग कर सकते हैं। जबकि केबल कार का समय सुबह 11 बजे से शाम के 6 बजे तक रहता है। बता दें कि मानसून के मौसम में यहां बोटिंग बंद होती है।

भेड़ाघाट जाने का सबसे अच्छा समय

भेड़ाघाट जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल का है। इस समय यहां का मौसम सुहावना होता है और सबसे ज्यादा पर्यटक भी इसी समय झरनों का मजा लेने पहुंचते हैं। बोटिंग के माध्यम से मार्बल रॉक के सुखद नजारों का अनुभव करना है तो अक्टूबर से अप्रैल के बीच ही भेड़ाघाट घूमने जाइए।

क्या मई के महीने में भेड़ाघाट जा सकते हैं

नर्मदा एक बाराहमासी नदी है और भेड़ाघाट में पनी सैकड़ों फीट गहरा है, तब भी यहां आप नाव की सवारी करने के साथ खूबसूरत चट्टानें देख सकते हैं। लेकिन गर्मियों में भेड़ाघाट की यात्रा करना सही समय नहीं है। इस समय यहां का तापमान 40 डिग्री होता है, लेकिन फिर भी अगर आप मई के महीने में भेड़ाघाट जाना चाहते हैं तो सुबह जल्दी घाट पर जाने की कोशिश करें।

 


विदिशा मध्य प्रदेश का एक बहुत बड़ा पर्यटन स्थल है और यदि आप इतिहास के बारे में जानने की रूचि रखते हैं पुरातत्व से जुड़े हुए हैं, तो आपको इस जगह पर अपने जीवन में एक बार जरुर आना चाहिए।
शिवपुरी मध्य प्रदेश राज्य का एक का प्रसिद्ध शहर है, जिसका अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि यह उस क्षेत्र के आसपास है, जहाँ हिंदू और मुगल शासकों ने समय तक शासन किया है।
अमरकंटक मध्य प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है जिसकी वजह से इसे “तीर्थराज” (तीर्थों का राजा) के रूप में भी जाना जाता है। बता दें कि अमरकंटक 1065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक हिल स्टेशन है,
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास भोजपुर गाँव में एक अधूरा हिंदू मंदिर है, जो भगवान् शिव को समर्पित है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके गर्भगृह में एक 7.5 फीट ऊंचा लिंग है।
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे पर स्थित होशंगाबाद जिला घूमने की एक बहुत अच्छी जगह है जिसमें कई पर्यटन स्थल शामिल है। यह शहर आकर्षण प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों और ऐतिहासिक स्मारकों के मिश्रण के साथ आपको एक अलग शांति का अनुभव कराता है।
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश का एक पवित्र और दर्शनीय स्थल है जो नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर स्थित है। इस शहर का नाम ओमकारा’ से लिया गया है जो भगवान् शिव का एक नाम है।
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मांडू मध्य प्रदेश का के बहुत खास पर्यटन स्थल है जो पूर्वजों ने हासिल वास्तु उत्कृष्टता का प्रतीक है। यह शहर राजकुमार बाज बहादुर और रानी रूपमती के सच्चे प्यार को बताता है। बता दें कि मांडू भारत का सबसे पुराना निर्मित स्मारक भी है जो काफी प्रसिद्ध है।
पचमढ़ी मध्य भारत में मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्तिथ, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। श्री पाच पांडव गुफा पंचमढी, जटाशंकर, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभयारण्य यहां के मुख्य आकर्षण है यह ब्रिटिश राज के बाद एक छावनी (पचमढ़ी छावनी) का स्थान रहा है। 
ओरछा मध्य प्रदेश में घूमने के लिए अच्छी जगहों में से एक है।  बेतवा नदी के तट पर स्थित यह शहर अपने किले, मंदिरों और महलों के लिए जाना-जाता है। 
भोजताल जिसे बड़ा तालाब या बड़ी झील के नाम से भी जाना जाता है मध्य-प्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल के बिल्कुल मध्य में है। इस झील का निर्माण परमार राजा भोज द्वारा 11वी सदी में करवाया गया था। इस तालाब के मध्य में राजा भोज की एक प्रतिमा स्थापित है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है इस प्रतिमा में उनके हाथ में एक तलवार सुशोभित हो रही है। बड़ी झील भोपाल की सबसे महत्वपूर्ण झील है जिसे आमतौर पर भोजताल के नाम से जाना जाता है इसी तालाब से भोपाल के निवासियों के लिए 40% पीने के पानी की पूर्ती की जाती है।
अगर आप मध्यप्रदेश में झरनों और संगमरमर की चट्टानों का आनंद लेना चाहते हैं, तो जबलपुर के पास स्थित भेड़ाघाट जाना अच्छा विकल्प है। भेड़ाघाट मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक शहर और नगर पंचायत है। जबलपुर शहर से लगभग 20 किमी दूर भेड़ाघाट नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। भेड़ाघाट को संगमरमरीय सौंदर्य और शानदार झरनों के लिए ही जाना जाता है, साथ ही धुआंधार जलप्रपात चमकती हुई मार्बल की 100 फीट ऊंची चट्टनों के लिए भी पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है।
ग्वालियर किला भारत में घूमने की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। ये किला मध्य भारत की सबसे प्राचीन जगह में से एक है। ग्वालियर फोर्ट मध्यप्रदेश स्टेट के ग्वालियर शहर में एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसे “ग्वालियर का किला” के नाम से भी जाना-जाता है। इस किले की ऊंचाई 35 मीटर है। यह किला करीब 10वीं शताब्दी से अस्तित्व में है। लेकिन इस किले में जो किला परिसर है उसके अंदर मिले शिलालेख और स्मारक इस बात का संकेत देते हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि यह किला 6 वीं शताब्दी की शुरुआत में अस्तित्व में रहा हो। इस किले के इतिहास के अनुसार इसे विभिन्न शासकों द्वारा नियंत्रित किया गया है। अगर आप ग्वालियर की सेर करने आये हैं तो आप यहाँ स्थित ग्वालियर किला जरुर घूमे।
महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो मध्य प्रदेश राज्य में रुद्र सागर झील के किनारे बसे प्राचीन शहर उज्जैन में स्थित है जो हिंदुओं के सबसे पवित्र और उत्कृष्ट तीर्थ स्थानों में से एक है। इस मंदिर में दक्षिण मुखी महाकालेश्वर महादेव भगवान शिव की पूजा की जाती है। महाकाल के यहां प्रतिदिन सुबह के समय भस्म आरती होती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें मुर्दे की भस्म से महाकाल का श्रृंगार किया जाता है। इस जगह को भगवान शिव का पवित्र निवास स्थान माना जाता है। यहां पर आधुनिक और व्यस्त जीवन शैली होने के बाद भी यह मंदिर यहां आने वाले पर्यटकों को पूरी तरह से मन की शांति प्रदान करता है।

कान्हा नेशनल पार्क मध्यप्रदेश में स्थित यह मध्य भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जो राष्टीय पशु बाघ और ऐसे कई जंगली जानवरों का आवास स्थान के लिए प्रसिद्ध है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश राज्य के मंडला जिले में स्थित ऐसा कस्बा है जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी प्राक्रतिक सुंदरता से आनंदित कर देता है। कान्हा नेशनल पार्क की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी और तब से यहां पर कई लुप्तप्राय प्रजातियों को संरक्षित किया गया है। 1974 में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व के तहत लिया गया था। वर्तमान में नेशनल पार्क का क्षेत्र 940 वर्ग किलोमीटर में फैला है जिसको दो अभयारण्यों हॉलन और बंजार में विभाजित किया गया है।
बांधवगढ़ नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के सबसे खास पर्यटकों स्थलों में से एक है जो पुराने समय में रीवा के महाराजाओं के लिए शिकारगाह था। यह राष्ट्रीय उद्यान बाघ अभयारण्य के रूप पूरी दुनिया में जाना जाता है। 
खजुराहो भारत के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश स्टेट का एक बहुत ही खास शहर और पर्यटक स्थल है जो अपने प्राचीन और मध्यकालीन मंदिरों के लिए देश भर में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश में कामसूत्र की रहस्यमई भूमि खजुराहो अनादिकाल से दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। छतरपुर जिले का यह छोटा सा गाँव स्मारकों के अनुकरणीय कामुक समूह के कारण विश्व-प्रसिद्ध है, जिसके कारण इसने यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में अपना स्थान बनाया है।खजुराहो का प्रसिद्ध मंदिर मूल रूप से मध्य प्रदेश में हिंदू और जैन मंदिरों का एक संग्रह है। ये सभी मंदिर बहुत पुराने और प्राचीन हैं जिन्हें चंदेल वंश के राजाओं द्वारा 950 और 1050 के बीच कहीं बनवाया गया था।