Madhya Pradesh

  • 04-Jan-2021
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पचमढ़ी मध्य भारत में मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्तिथ, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। श्री पाच पांडव गुफा पंचमढी, जटाशंकर, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभयारण्य यहां के मुख्य आकर्षण है यह ब्रिटिश राज के बाद एक छावनी (पचमढ़ी छावनी) का स्थान रहा है। 

Madhya Pradesh पचमढ़ी पर्यटन - Pachmarhi Tourism

यहां मध्य प्रदेश और सतपुड़ा रेंज का सबसे ऊंचा बिंदु, धुपगढ़ (1,352 मीटर) स्थित है जो कि पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व का एक हिस्सा है। इस लेख में आप पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा, इतिहास, पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल, पचमढ़ी जाने का सही समय और अन्य जानकारी प्राप्त करेंगे

पचमढ़ी कहां स्तिथ है

पचमढ़ी सतपुड़ा रेंज में 1067 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा में घूमने के लिए कई जगह हैं जैसे कि ऐतिहासिक स्मारक, झरने, प्राकृतिक क्षेत्र, गुफा, जंगल, और कई अन्य दर्शनीय स्थल। जहां प्रकृति प्रेमी पंचमढ़ी कि सुन्दरता का अनुभव कर सकते है। पचमढ़ी हिल स्टेशन पर बने घर औपनिवेशिक वास्तुकला शैली में बने हुए हैं।

पचमढ़ी का यह नाम कैसे पड़ा

माना जाता है कि पचमढ़ी का नाम हिंदी शब्द पंच (“पांच”) और मढ़ी (“गुफाओं”) से लिया गया है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, इन गुफाओं को महाभारत युग के पांच पांडव भाइयों ने अपने तेरह वर्ष के निर्वासन के दौरान बनाया था। यह गुफाएं पहाड़ी की चोटी पर स्थित हैं। एक उत्कृष्ट द्रश्य प्रदान करती हैं और पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल मै से एक है।

पचमढ़ी का इतिहास

ब्रिटिश आगमन के समय, पचमढ़ी क्षेत्र गोंड राजा भभूत सिंह के राज्य में था, हालांकि उस समय यह एक कम आबादी वाला गांव या शहर था। सूबेदार मेजर नाथू रामजी पोवार के साथ ब्रिटिश सेना के कप्तान जेम्स फोर्सिथ, जिन्हें बाद में कोटवाल बनाया गया, इन दोनों ने मिलकर सन 1857 में पचमढ़ी कि पहाड़ों की खोज अपनी झांसी कि यात्रा के दौरान की थी। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल तेजी से भारत के केंद्रीय प्रांतों के रूप में विकसित हुआ और यहां ब्रिटिश सैनिकों के लिए हिल स्टेशन और सैनिटेरियम (Sanatorium) बनाये गए ।

पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल

  • पचमढ़ी के पर्यटन स्थलों का भ्रमण
  • पचमढ़ी में बी वॉटरफॉल
  • जटा शंकर गुफाएं
  • पांडव गुफा पचमढ़ी
  • धूपगढ़
  • हांडी खोह पचमढ़ी
  • महादेव हिल्स पचमढ़ी
  • डचस झरना पचमढ़ी
  • सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान पचमढ़ी
  • प्रियदर्शिनी प्वाइंट पचमढ़ी
  • चौरागढ़ मंदिर पचमढ़ी

पचमढ़ी में देखने के लिए बी फॉल

ये उन प्राकृतिक झरनों में से एक हैं जहां का पानी पीने योग्य है। इसके आसपास के शांत और हरे-भरे पहाड़ों कि सुन्दरता देखते ही बनती है। अपने पचमढ़ी टूर पर, आप इन झरनों पर दिन का समय व्यतीत कर सकते हैं। ये प्राकृतिक झरने हैं जो नीचे की घाटी में जाकर मिलते हैं। ये झरना एक बाथिंग पूल भी है जो कि इसे एक आकर्षक पिकनिक स्पॉट बनाता है जहां आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आनंद उठा सकते हैं। ऐसे कई पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल हैं जिनमें कई सुंदर स्थान और ऐतिहासिक महत्व कि धरोहरें हैं।

पचमढ़ी में दर्शन के लिए जटा शंकर गुफाएं

ये प्राचीन गुफाएं हैं जो पूजी जाती हैं और इनका एक ऐतिहासिक महत्व हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने राक्षस भस्मासुर से खुद को बचाने के लिए इन गुफाओं में शरण ली थी। इन गुफाओं के अंदर, एक शिवलिंग है जो स्वाभाविक रूप से गठित होता है और इस गुफा का आकार में सांप देवता शेषनाग के आकार का है जिसका हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णन एक खगोलीय हजार मुंह वाले सांप के जैसा है। ऐसा कहा जाता है कि गुफा की चट्टान का गठन भगवान शिव के बालों की तरह दिखता है। यह गुफा पचमढ़ी में देखने के लिए प्रसिद्ध स्थानों में से एक है और भक्त इन गुफाओं में जाकर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।

पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल पांडव गुफा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडव निर्वासित हुए तो ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने इन गुफाओं के अंदर आश्रय लिया था। पहली शताब्दी के दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने भी इन गुफाओं में आश्रय लिया था। तब से, इन गुफाओं ने हिंदुओं और बौद्धों के लिए धार्मिक महत्व ले लिया है। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल में पांडव गुफा को जरुर देखने जाएं।

पचमढ़ी हिल स्टेशन धूपगढ़

पचमढ़ी हिल स्टेशन को ‘सतपुड़ा की रानी’ के नाम से जाना जाता है। पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा मै आप धूपगढ़ सनराइज और सनसेट जरुर देखने जाए यह एक सुंदर पहाड़ की चोटी है। यह ट्रेकिंग, हाइकिंग और पचमढ़ी के स्थलों के भ्रमण के लिए एक लोकप्रिय जगह है। प्रकृति और एडवेंचर लवर्स इस जगह पर खूबसूरत तस्वीरें ले सकते हैं और इसके साथ ही ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। ट्रेक करने के लिए यहां पर सुंदर घाटियों और मनमोहक परिदृश्य (Landscapes) मौजूद हैं।

पचमढ़ी का लोकप्रिय पर्यटक स्थल हांडी खोह

यह पचमढ़ी पहाड़ी स्टेशन में स्थित सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक है। यह जमीन से 300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हांडी खोह घने जंगलों से ढका हुआ है और यहां पर एक समृद्ध पौराणिक इतिहास देखने को मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि एक जहरीले सांप ने इस भूमि को ढंक लिया था जिसे फिर भगवान शिव ने नष्ट कर दिया। इसमें एक झील थी जो सांप को खत्म करने के बाद सूख गई थी। यहां शांति भरा वातावरण है और यहां आकर आप एक पुराने आकर्षण का अनुभव कर सकते है।

पचमढ़ी में महादेव हिल्स की यात्रा 

महादेव हिल्स (पहाड़ी) में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर बना हुआ है। इसमें भगवान शिव और शालिग्राम (Shaligram) की एक मूर्ति है जो हिंदूओं द्वारा प्राचीन और पवित्र मानी जाती है। इस पहाड़ी इलाके में एक गुफा भी मौजूद है जिसमें चित्र बने हुए हैं, और इसके अलावा एक तालाब है जिसमें पवित्र पानी बहता है और यहां भक्त डुबकी लगा सकते हैं।

पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल में डचस फाल्स

ये पचमढ़ी हिल स्टेशन में स्तिथ वाटर फॉल है जो राजसी महानता को दर्शाता है। यह कुछ सौ मीटर से अधिक सीमा तक झरने के रूप में गिरता है। इसमें गिरता हुआ पानी अलग-अलग कैस्केड में बदल जाता है और यहां आपको एक सुंदर दृश्य देखने को मिलता है। आप इन झरनों को देखने के लिए जा सकते हैं और तस्वीरें ले कर अपने पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा को और भी रोमांचक बना सकते हैं।

पचमढ़ी पर्यटन में सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान

यह राष्ट्रीय उद्यान एक बाघ अभयारण्य ( Tiger Reserve) है और यहां आपको विभिन्न वनस्पतियों और जानवरों को देखने का मौका मिलेगा। यह एक वन्यजीव अभयारण्य है जो सतपुड़ा रेंज के पहाड़ों में स्थित है। यह पार्क 202 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें कई लुप्तप्राय प्रजातियां रहती हैं, और यहां विभिन्न प्रकार के जानवर जैसे पोर्क्यूपिन, जंगली सूअर, मगरमच्छ, लंगूर, सफेद बाइसन, भारतीय विशाल गिलहरी, और इसके अलावा घास के मैदान, औषधीय पौधे, और जल निकाय मौजूद हैं। यदि आप नवंबर और दिसंबर के महीने में इस राष्ट्रीय उद्यान में जाते हैं तो आप प्रवासी पक्षियों (Migratory Birds) को भी देख सकते हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान पचमढ़ी पर्यटन स्थल में जाने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है।

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश शुल्क कुछ इस प्रकार हैं-

  • भारतीय पर्यटक – 250 रूपए
  • विदेशी पर्यटक – 500 रूपए
  • जीप सफारी के लिए 3 अलग-अलग पैकेज हैं, जो 2750 रूपये, 3050 रूपये और 6700 रूपये हैं।


पचमढ़ी इंडिया दर्शनीय स्थल में से एक प्रियदर्शिनी

पचमढ़ी में प्रियदर्शिनी प्वाइंट वह जगह है जो आपको पूरे पचमढ़ी हिल स्टेशन के बारे में एक मन मोह लेने वाला बर्ड आई व्यू देता है जहां आप यहां से कई सुंदर स्थान और क्षेत्रों को देख सकते हैं। इस स्थान को 18 वीं शताब्दी में खोजा गया था और यह तब से पचमढ़ी हिल स्टेशन का सुंदर दृश्य देखने के लिए एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन गया है। यहां एक शांत परिदृश्य (Serene Landscape) है और तस्वीरों को लेने के लिए कैमरा लवर्स (Shutterbugs) के लिए एक उत्तम स्थान है। पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ कर सकते है।

पचमढ़ी आकर्षण स्थल चौरागढ़ मंदिर

यह पचमढ़ी हिल स्टेशन में मौजूद एक प्राचीन और सबसे सम्मानित मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में जाने के लिए आपको 1300 सीढ़ियों को चढ़ना होगा। मंदिर के अंदर, आपको हजारों त्रिशूल मिलेंगें जो इस मंदिर की दीवार पर फंसें हुए हैं। हर साल हजारों भक्त इस मंदिर में प्रार्थना करने के लिए आते हैं। यह मंदिर घाटियों और जंगलों से घिरा हुआ है। जब आप सुबह-सुबह इस मंदिर में के दर्शन को जाते हैं तो आप सूर्योदय का एक लुभावना दृश्य देख सकते हैं। आप पचमढ़ी टूर गाइड में कई और स्थानों पर भी जा सकते हैं।


विदिशा मध्य प्रदेश का एक बहुत बड़ा पर्यटन स्थल है और यदि आप इतिहास के बारे में जानने की रूचि रखते हैं पुरातत्व से जुड़े हुए हैं, तो आपको इस जगह पर अपने जीवन में एक बार जरुर आना चाहिए।
शिवपुरी मध्य प्रदेश राज्य का एक का प्रसिद्ध शहर है, जिसका अपना अलग ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि यह उस क्षेत्र के आसपास है, जहाँ हिंदू और मुगल शासकों ने समय तक शासन किया है।
अमरकंटक मध्य प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है जिसकी वजह से इसे “तीर्थराज” (तीर्थों का राजा) के रूप में भी जाना जाता है। बता दें कि अमरकंटक 1065 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक हिल स्टेशन है,
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पास भोजपुर गाँव में एक अधूरा हिंदू मंदिर है, जो भगवान् शिव को समर्पित है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके गर्भगृह में एक 7.5 फीट ऊंचा लिंग है।
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे पर स्थित होशंगाबाद जिला घूमने की एक बहुत अच्छी जगह है जिसमें कई पर्यटन स्थल शामिल है। यह शहर आकर्षण प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों और ऐतिहासिक स्मारकों के मिश्रण के साथ आपको एक अलग शांति का अनुभव कराता है।
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश का एक पवित्र और दर्शनीय स्थल है जो नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर स्थित है। इस शहर का नाम ओमकारा’ से लिया गया है जो भगवान् शिव का एक नाम है।
भीमबेटका गुफ़ाएँ (भीमबेटका रॉक शेल्टर या भीमबैठका) भारत के मध्य-प्रदेश राज्य के रायसेन जिले में एक पुरापाषाणिक पुरातात्विक स्थल है। जो मध्य-प्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल के दक्षिण-पूर्व में लगभग 46 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मांडू मध्य प्रदेश का के बहुत खास पर्यटन स्थल है जो पूर्वजों ने हासिल वास्तु उत्कृष्टता का प्रतीक है। यह शहर राजकुमार बाज बहादुर और रानी रूपमती के सच्चे प्यार को बताता है। बता दें कि मांडू भारत का सबसे पुराना निर्मित स्मारक भी है जो काफी प्रसिद्ध है।
पचमढ़ी मध्य भारत में मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्तिथ, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। श्री पाच पांडव गुफा पंचमढी, जटाशंकर, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभयारण्य यहां के मुख्य आकर्षण है यह ब्रिटिश राज के बाद एक छावनी (पचमढ़ी छावनी) का स्थान रहा है। 
ओरछा मध्य प्रदेश में घूमने के लिए अच्छी जगहों में से एक है।  बेतवा नदी के तट पर स्थित यह शहर अपने किले, मंदिरों और महलों के लिए जाना-जाता है। 
भोजताल जिसे बड़ा तालाब या बड़ी झील के नाम से भी जाना जाता है मध्य-प्रदेश राज्य की राजधानी भोपाल के बिल्कुल मध्य में है। इस झील का निर्माण परमार राजा भोज द्वारा 11वी सदी में करवाया गया था। इस तालाब के मध्य में राजा भोज की एक प्रतिमा स्थापित है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है इस प्रतिमा में उनके हाथ में एक तलवार सुशोभित हो रही है। बड़ी झील भोपाल की सबसे महत्वपूर्ण झील है जिसे आमतौर पर भोजताल के नाम से जाना जाता है इसी तालाब से भोपाल के निवासियों के लिए 40% पीने के पानी की पूर्ती की जाती है।
अगर आप मध्यप्रदेश में झरनों और संगमरमर की चट्टानों का आनंद लेना चाहते हैं, तो जबलपुर के पास स्थित भेड़ाघाट जाना अच्छा विकल्प है। भेड़ाघाट मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक शहर और नगर पंचायत है। जबलपुर शहर से लगभग 20 किमी दूर भेड़ाघाट नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। भेड़ाघाट को संगमरमरीय सौंदर्य और शानदार झरनों के लिए ही जाना जाता है, साथ ही धुआंधार जलप्रपात चमकती हुई मार्बल की 100 फीट ऊंची चट्टनों के लिए भी पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है।
ग्वालियर किला भारत में घूमने की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। ये किला मध्य भारत की सबसे प्राचीन जगह में से एक है। ग्वालियर फोर्ट मध्यप्रदेश स्टेट के ग्वालियर शहर में एक पहाड़ी पर स्थित है, जिसे “ग्वालियर का किला” के नाम से भी जाना-जाता है। इस किले की ऊंचाई 35 मीटर है। यह किला करीब 10वीं शताब्दी से अस्तित्व में है। लेकिन इस किले में जो किला परिसर है उसके अंदर मिले शिलालेख और स्मारक इस बात का संकेत देते हैं कि ऐसा भी हो सकता है कि यह किला 6 वीं शताब्दी की शुरुआत में अस्तित्व में रहा हो। इस किले के इतिहास के अनुसार इसे विभिन्न शासकों द्वारा नियंत्रित किया गया है। अगर आप ग्वालियर की सेर करने आये हैं तो आप यहाँ स्थित ग्वालियर किला जरुर घूमे।
महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो मध्य प्रदेश राज्य में रुद्र सागर झील के किनारे बसे प्राचीन शहर उज्जैन में स्थित है जो हिंदुओं के सबसे पवित्र और उत्कृष्ट तीर्थ स्थानों में से एक है। इस मंदिर में दक्षिण मुखी महाकालेश्वर महादेव भगवान शिव की पूजा की जाती है। महाकाल के यहां प्रतिदिन सुबह के समय भस्म आरती होती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें मुर्दे की भस्म से महाकाल का श्रृंगार किया जाता है। इस जगह को भगवान शिव का पवित्र निवास स्थान माना जाता है। यहां पर आधुनिक और व्यस्त जीवन शैली होने के बाद भी यह मंदिर यहां आने वाले पर्यटकों को पूरी तरह से मन की शांति प्रदान करता है।

कान्हा नेशनल पार्क मध्यप्रदेश में स्थित यह मध्य भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जो राष्टीय पशु बाघ और ऐसे कई जंगली जानवरों का आवास स्थान के लिए प्रसिद्ध है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश राज्य के मंडला जिले में स्थित ऐसा कस्बा है जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी प्राक्रतिक सुंदरता से आनंदित कर देता है। कान्हा नेशनल पार्क की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी और तब से यहां पर कई लुप्तप्राय प्रजातियों को संरक्षित किया गया है। 1974 में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व के तहत लिया गया था। वर्तमान में नेशनल पार्क का क्षेत्र 940 वर्ग किलोमीटर में फैला है जिसको दो अभयारण्यों हॉलन और बंजार में विभाजित किया गया है।
बांधवगढ़ नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के सबसे खास पर्यटकों स्थलों में से एक है जो पुराने समय में रीवा के महाराजाओं के लिए शिकारगाह था। यह राष्ट्रीय उद्यान बाघ अभयारण्य के रूप पूरी दुनिया में जाना जाता है। 
खजुराहो भारत के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश स्टेट का एक बहुत ही खास शहर और पर्यटक स्थल है जो अपने प्राचीन और मध्यकालीन मंदिरों के लिए देश भर में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश में कामसूत्र की रहस्यमई भूमि खजुराहो अनादिकाल से दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। छतरपुर जिले का यह छोटा सा गाँव स्मारकों के अनुकरणीय कामुक समूह के कारण विश्व-प्रसिद्ध है, जिसके कारण इसने यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में अपना स्थान बनाया है।खजुराहो का प्रसिद्ध मंदिर मूल रूप से मध्य प्रदेश में हिंदू और जैन मंदिरों का एक संग्रह है। ये सभी मंदिर बहुत पुराने और प्राचीन हैं जिन्हें चंदेल वंश के राजाओं द्वारा 950 और 1050 के बीच कहीं बनवाया गया था।